Sunday, 9 July 2023

चेला की परीक्षा

एक गुरु जी थे वो अपने आश्रम में बड़े ही शांत स्वभाव से रहते थे.एक बार उनके पास दो व्यक्ति उनके आश्रम में गए और उनको अपना गुरु बनाने की इच्छा प्रकट की,गुरु जी बड़े ज्ञानी थे उन्होंने उनकी परिक्षा लेने की सोची,गुरु जी ने कहा में आपका गुरु बनने को तैयार हूँ किन्तु मेरी एक संका है तुम उसे दूर कर दोगे तो में निश्चित हो जाऊंगा. गुरु जी ने उन दोनों को एक-एक तरबूज दिया और कहा जहाँ कोई ना हो इसको काट के ले आना. फिर दोनों लोग वहां से तरबुज ले के चले जाते है. एक व्यक्ति कुछ देर बाद वापिस आता है और कटा हुआ तरबूज लाता है.गुरु जी उससे पूछते है कि जब तुमने ये तरबूज काटा था तो उस समय तुम्हे किसी ने नहीं देखा तब उस व्यक्ति ने जबाब दिया कि गुरु जी ये तरबूज में जब काट रहा था तब में एक बड़े से पहाड़ के पीछे छुपा था मुझे किसी ने नहीं देखा. तब कुछ देर बाद वो दूसरा व्यक्ति आया और जो उसके हाथ में तरबूज था वो वैसा ही था जैसा वो लेके गया था. उसने गुरूजी को बताया गुरु जी मुझे वो कोई स्थान नहीं मिला जहां कोई नहीं हो मुझे कही वायु कही वृक्ष कही पहाड हर जगह कोई न कोई था इस लिए में इसे नहीं काट सका मुझे माफ कर दे. उस व्यक्ति की ऐसी बात सुनकर गुरु जी अत्यंत प्रसन्न हुए और उसको अपना चेला बना लिया और दूसरे को बोले भाई तू घर जा और इस तरबूज को खा. इस तरह ज्ञानी शिष्य पाकर गुरुजी प्रसन्न हुए. राधे राधे 🙏🙏

No comments:

Post a Comment